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ARN
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एक टीम
जिसमें भारतीय मूल के
वैज्ञानिक ने पाया है
भी शामिल है) कि
वसा की जो परतें कमर के आसपास
इकट्ठी हो जाती हैं, वे साइलेंट किलर
साबित हो सकती हैं। मिशिगन स्टेट
यनिवर्सिटी की इस रिसर्च के
बेली कैंट में दो तरह की परतें होती हैं।
ऊपरी परतजो स्किन के ठीक नीचे
होती है, वह सबक्यूटेनियल फैट है और
इसके नीचे वाली परत विसरल फैट
कहलाती है। वसा खतरनाक है।
यह
कैंसर की आशंका
डॉ. देवप चक्रवर्ती कहते हैं कि कमर
पर जमा यह वसा धीरे धीरे कैंसरयुक्त
हो सकती है। विसरल एडीपोस टिश्यू
पेट के भीतरी हिस्से में स्थित विभिन्न
अंगों के आसपास इकट्ठे होकर कई तरह
की सेहत समस्याएं उत्पन्न करने लगते
हैं। यह फैट लिवरपैंक्रियाज और
आंतों के इर्दगिर्द जमा होकर उन पर
दबाव डालती है और उनकी
कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
एक्सपर्ट इसे एक्टिव फैट भी कहते हैं।
क्योंकि यह मेटाबोलिकली एक्टिव रहने
के साथ ही हानिकारक केमिकल्स
(एडीपोकिन्ससाइटोकिन्स व अन्य)।
भी रिलीज करती है।
सुकून की बात यह है कि
विसरल फैट इतनी एक्टिव
होती है कि हम चाहें तो इससे
आसानी से मुक्ति पा सकते हैं।
अपना खानपान संयत करके
और फिजिकल एक्टीविटी
बढ़ाकर इससे आसानी से
छुटकारा पाया जा सकता है।
यह दूसरे फैट डिपॉजिट के
मुकाबले तेजी से पिघलती है।
उलूकोज बढ़ता है
वैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह भी पाया
कि विसरल फैट की वजह से शरीर
इंसुलिन रेजिस्टेंट हो जाता है और ब्लड
ग्लूकोज लेवल भी बढ़ जाता है।
विसरल फैट की वजह से लिवर एवं
मसल्स इंसुलिन के प्रति कम सेंसिटिव
हो जाते हैं।
गलत जीवनशैली
खानपान भी इसे प्रभावित करता है।
उल्टा-सीधा खाने और बेपरवाह
जीवनशैली की वजह से विसरल फैट
से फैटी एसिड्स का उत्सर्जन होता है,
चाहे शरीर को इसकी जरूरत हो या
नहीं, जो नुकसानदायक होता है।
जिसमें भारतीय मूल के
वैज्ञानिक ने पाया है
भी शामिल है) कि
वसा की जो परतें कमर के आसपास
इकट्ठी हो जाती हैं, वे साइलेंट किलर
साबित हो सकती हैं। मिशिगन स्टेट
यनिवर्सिटी की इस रिसर्च के
बेली कैंट में दो तरह की परतें होती हैं।
ऊपरी परतजो स्किन के ठीक नीचे
होती है, वह सबक्यूटेनियल फैट है और
इसके नीचे वाली परत विसरल फैट
कहलाती है। वसा खतरनाक है।
यह
कैंसर की आशंका
डॉ. देवप चक्रवर्ती कहते हैं कि कमर
पर जमा यह वसा धीरे धीरे कैंसरयुक्त
हो सकती है। विसरल एडीपोस टिश्यू
पेट के भीतरी हिस्से में स्थित विभिन्न
अंगों के आसपास इकट्ठे होकर कई तरह
की सेहत समस्याएं उत्पन्न करने लगते
हैं। यह फैट लिवरपैंक्रियाज और
आंतों के इर्दगिर्द जमा होकर उन पर
दबाव डालती है और उनकी
कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
एक्सपर्ट इसे एक्टिव फैट भी कहते हैं।
क्योंकि यह मेटाबोलिकली एक्टिव रहने
के साथ ही हानिकारक केमिकल्स
(एडीपोकिन्ससाइटोकिन्स व अन्य)।
भी रिलीज करती है।
सुकून की बात यह है कि
विसरल फैट इतनी एक्टिव
होती है कि हम चाहें तो इससे
आसानी से मुक्ति पा सकते हैं।
अपना खानपान संयत करके
और फिजिकल एक्टीविटी
बढ़ाकर इससे आसानी से
छुटकारा पाया जा सकता है।
यह दूसरे फैट डिपॉजिट के
मुकाबले तेजी से पिघलती है।
उलूकोज बढ़ता है
वैज्ञानिकों ने अपने शोध में यह भी पाया
कि विसरल फैट की वजह से शरीर
इंसुलिन रेजिस्टेंट हो जाता है और ब्लड
ग्लूकोज लेवल भी बढ़ जाता है।
विसरल फैट की वजह से लिवर एवं
मसल्स इंसुलिन के प्रति कम सेंसिटिव
हो जाते हैं।
गलत जीवनशैली
खानपान भी इसे प्रभावित करता है।
उल्टा-सीधा खाने और बेपरवाह
जीवनशैली की वजह से विसरल फैट
से फैटी एसिड्स का उत्सर्जन होता है,
चाहे शरीर को इसकी जरूरत हो या
नहीं, जो नुकसानदायक होता है।
तोंद वाले व्यक्ति
खाते पीते घर का
' बताकर गर्व महसूस
करते हैं। सच्चाई यह ,
है कि बाहर निकली ।
हुई तोद अमीरी नहीं
बीमारी का प्रतीक ।
सेहत विज्ञानियों की
माओं को समय रहते न
चेतने पर पॉट बेली
कैंसर का सबब भी
बन सकती है।
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