- Get link
- X
- Other Apps
Posted by
ARN
on
- Get link
- X
- Other Apps
जीपीएस तकनीक मस्तिष्क की
शल्यक्रिया में भी क्रांतिकारी बदलाव
कर रही है। जब मस्तिष्क की सर्जरी
की जाती है तब, नेवीगेशन सिस्टम
डॉक्टरों के लिए मस्तिष्क की
संरचनाओं तक पहुंच संभव बनाता
है, ताकि आसपास के उत्तकों को
कम से कम नुकसान पहुंचेइस
सिस्टम की सहायता से डॉक्टर
खोपड़ी और मस्तिष्क के अंदर
आसानी से देख सकते हैं, जिससे
गहराई में स्थित ट्यूमर तक पहुंचना
संभव होता है। इससे डॉक्टर
सफलतापूर्वक पूरे ट्यूमर को
निकाल लेते हैं और आसपास के
स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं
पहुंचता है। भारत में भी डॉक्टर इस
तकनीक का कुशलतापूर्वक
इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक विशेष वर्कस्टेशन में जब
एमआरआई से प्राप्त सूचनाएं डाल
दी जाती है तो इसका सिस्टम नाक
और भौंहों जैसे बाहरी चिन्ह
एमआरआई इमेज और ऑपरेटिंग
कक्ष में मौजूद मरीज के जरिए
पहचानना शुरू कर देता है तथा
डाटा के दो सैट आपस में मिलाता
है। इसके बाद रेफेरेन्स पॉइंट्स और
ऑप्टिकल डिटेक्टर जीपीएस
त्रिकोणीय सिद्धांत पर काम करते हैं।
इससे डॉक्टर को एक पॉइंटर से यह
पता लगाने में सहायता मिलती है कि
एक निश्चित समय पर कहां काम
करना है। इससे सर्जन को पूरा सिर
साफ करने के बजाए बिल्कुल
सही जगह कट लगाने में सहायता
मिलती है और वे सर्जरी के दौरान
उसी स्थान पर ध्यान केन्द्रित कर
पाते हैं। इसे न्यूरोनेवीगेशन कहा
जाता है। मस्तिष्क के ट्यूमर के
सर्जिकल प्रबंधन में न्यूरोनेवीगेशन
सर्वव्यापक उपकरण बन गया है।
जीपीएस तकनीक के क्या
फायदे हैं?
इस तकनीक में सिर के बाल साफ
करने की जरूरत नहीं पड़ती। ट्यूमर
के बिल्कुल ऊपर एक छेद करना।
होता है। इससे सर्जरी के बाद होने
वाली परेशानियों से बचा जा सकता
है। स्पेशल एमआरआई के जरिए से
बोलने और समझने वाले ब्रेन के
उस भाग को मार्क कर निश्चित किया
जाता है कि ऑपरेशन के दौरान
उसके भीतर कोई नुकसान न हो।
Comments
Post a Comment