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ARN
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आयोडीन का शरीर के विकास में
काफी अहम रोल है। इसकी कमी होने
पर शरीर में कई दिक्कतें हो सकती हैं।
खासकर गर्भवती महिला और नवजात
शिशु को। ऐसे में इस बात का ध्यान
जरूर रखें कि डाइट में इसकी सीमित
मात्रा जरूर शामिल हो। जानते हैं।
आयोडीन क्यों है शरीर के लिए जरूरी.
है जो थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए
बेहद जरूरी है। आयोडीन की कमी से हाइप
थायराइडिज्म हो जाता है। अगर समय रहते
इस पर ध्यान न दिया जाए तो तो गर्भधारण
करने में समस्या आना बांझपन नवजात
शिशु में तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित गड़बड़ियां
आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।
पर भी कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। वैसे
कई लक्षण हैं जिनसे हाइपोथायरॉइडिज्म
की पहचान होती है। कुछ लक्षण देखकर
इसे पहचाना जा सकता है जैसे अक्सर
थकान रहना, मांसपेशियों की कमजोरी
रहना, मासिक चक्र संबंधी गड़बड़ियां, ध्यान
केंद्रित करने में समस्या आना याददाश्त
कमजोर पड़ जाना आसामान्य रूप से
वजन बढ़ जाना, अवसाद, बाल झड़ना
त्वचा का रूखा हो जाना और हृदय की
धड़कनें धीमी हो जाना। इनमें कोई लक्षण
दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें
पालक, किनुआ, राजमा, बादाम, दालें।
ओट्स शामिल करें।
तौर पर प्रभावित करता है इसके साथ ही
निकोटिन शरीर से आयोडीन को अवशोषित
करता है जिससे हार्मोन का स्रावण प्रभावित
होता है। यह सबसे सामान्य कारण है जो
बांझपन में योगदान देता है और हमेशा ध्यान
रखें कि आयोडीन का सेवन सीमित मात्रा में
करना है। अधिक या कम मात्रा में आयोडीन का
सेवन आयोडीन संबंधी गड़बड़ियों की आशंका
बढ़ा देता है साथ ही नियमित रूप से योग और
ध्यान करें, इससे आपको मानसिक शांति
मिलेगी जो थायराइड को रोकने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभा सकती है।
काफी अहम रोल है। इसकी कमी होने
पर शरीर में कई दिक्कतें हो सकती हैं।
खासकर गर्भवती महिला और नवजात
शिशु को। ऐसे में इस बात का ध्यान
जरूर रखें कि डाइट में इसकी सीमित
मात्रा जरूर शामिल हो। जानते हैं।
आयोडीन क्यों है शरीर के लिए जरूरी.
कमी से होता है हाइपो थाइरॉयडिज्म
आयोडीन एक महत्वपूर्ण माइक्रो-न्यूट्रीएंट्सहै जो थायरॉइड हार्मोन के निर्माण के लिए
बेहद जरूरी है। आयोडीन की कमी से हाइप
थायराइडिज्म हो जाता है। अगर समय रहते
इस पर ध्यान न दिया जाए तो तो गर्भधारण
करने में समस्या आना बांझपन नवजात
शिशु में तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित गड़बड़ियां
आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।
पहचानें लक्षण
कुछ लोगों में आयोडीन का स्तर कम होनेपर भी कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। वैसे
कई लक्षण हैं जिनसे हाइपोथायरॉइडिज्म
की पहचान होती है। कुछ लक्षण देखकर
इसे पहचाना जा सकता है जैसे अक्सर
थकान रहना, मांसपेशियों की कमजोरी
रहना, मासिक चक्र संबंधी गड़बड़ियां, ध्यान
केंद्रित करने में समस्या आना याददाश्त
कमजोर पड़ जाना आसामान्य रूप से
वजन बढ़ जाना, अवसाद, बाल झड़ना
त्वचा का रूखा हो जाना और हृदय की
धड़कनें धीमी हो जाना। इनमें कोई लक्षण
दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें
ऐसे करें पूर्ति
शरीर में आयोडीन की पूर्ति के लिए डाइट मेंपालक, किनुआ, राजमा, बादाम, दालें।
ओट्स शामिल करें।
ऐसे करें रोकथाम
धूम्रपान बंद करें , धूम्रपान थाइराइड को सीधेतौर पर प्रभावित करता है इसके साथ ही
निकोटिन शरीर से आयोडीन को अवशोषित
करता है जिससे हार्मोन का स्रावण प्रभावित
होता है। यह सबसे सामान्य कारण है जो
बांझपन में योगदान देता है और हमेशा ध्यान
रखें कि आयोडीन का सेवन सीमित मात्रा में
करना है। अधिक या कम मात्रा में आयोडीन का
सेवन आयोडीन संबंधी गड़बड़ियों की आशंका
बढ़ा देता है साथ ही नियमित रूप से योग और
ध्यान करें, इससे आपको मानसिक शांति
मिलेगी जो थायराइड को रोकने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभा सकती है।
महिलाएं ध्यान दें
बांझपन को दूर करने के लिए किए
जाने वाले प्रयासों में हाइपोथायराइडिज्म
का उपचार एक महत्वपूर्ण भाग है।
अगर हाइपोथायरॉइडिज्म का उपचार
करने के बाद में बांझपन की समस्या
बरकरार रहती है तब दूसरे उपचार की
आवश्यकता पड़ती है। गर्भवती
महिलाओं को जितनी जल्दी से जल्दी हो
सके, विशेषज्ञ की सलाह से शरीर में
थायरॉइड के स्तर की जांच करा कर
इसकी पूर्ति कर लेनी चाहिए साथ ही
चिकित्सक के संपर्क में रहना चाहिए
महिलाओं के शरीर में आयोडीन की कमी का उसके प्रजनन तंत्र की कार्यप्रणाली से सीधा
संबंध है। हाइपोथायराइडिज्म बांझपन और गर्भपात का सबसे प्रमुख कारण है। जब
थायराइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली धीमी पड़ जाती है तो वह पर्याप्त हार्मोन का
उत्पादन नहीं कर पाती है तो अंडाशयों से अंडों को रिलीज करने में बाधा आती है जो
बाझपन का कारण बन जाती है। जो महिलाएं हाइपोथायराइडिज्म का शिकार होती है
उसमें सेक्स में अरूचि, मासिक चक्र से संबधित गड़बड़ियां और गर्भधारण करने में
समस्या आता देखा जाता है। हाइपोथायराइडिज्म से पीड़ित महिलाएं अगर गर्भधारण
कर भी लेती हैं, तो गर्भ का विकास प्रभावित होता है।
इनसे बचें।
अत्यधिक मात्रा मेंसोय आइसोफ्लेवोन्स गॉइटर या मोड्यूल्स
को गंभीर कर सकते हैं। सोय सप्लीमेंट्स और पाउडर का सेवन कम मात्रा में करें दिनभर में सोयाबीज के एक आइटम से अधिक न खाएं वो भी थोड़ी मात्रा में और जिन बच्चों को बहुत छोटी उम्र में सोयाबीज युक्त उत्पाद खिलाएं जाते हैं उनमें बड़े होकर थायरॉइड रोग का खतरा बढ़ जाता है।
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