बच्चों में गुड डाइट है जरूरी

इण्डियन मेडिकल रिसर्च में हाल ही 52 अलग-अलग
अध्ययनों की समीक्षा में बताया गया है कि बच्चों
में डायबिटीज और मोटापे जैसी कॉनिक डिजीज का
जोखिम्र बढ़ता जा रहा है। खानपार की गलत आदतें
इसकी बड़ी वजह के रूप में सामने आई हैं। बच्चों में
मोटापा उच्च आय वर्ग में ही नहीं निम्न आयवर्ग के लोगों में भी देखा जा रहा है। हैल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि बचपन में
खानपान की जैसी आदतें डाल दी जाती हैं, वे ही आगे चलकर बच्चे की सेहत का हाल तय कर देती हैं। छुटपन से ।
ही पौष्टिक और सुपाच्य डाइट लेने की आदत डाल दी जाएं तो बच्चे का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।

सतर्कता जरूरी

गेट युअर चिल्ड्रेन टू ईट राइट विदाउट द
फाइट' की लेखिका और
कंसलटेंट नीलांजना सिंह ने बच्चों के
खानपान के संबंध में शुरू से ही सतर्क
रहने की जरूरत बताई है। बच्चे में डाइट
की सही आदत पड़ जाएइसके लिए
उन्होंने पेरेन्ट्स को कुछ खास बातों पर
ध्यान देने की सलाह दी है। एक हैल्दी
डाइट प्लान बच्चे की प्लेट तक ही सीमित
नहीं रहता। घर का पूरा माहौल ही हैल्दी
और पौष्टिक भोजन करने का होना चाहिए।
घर में तली भुनी चीजों, एयरेटेड ड्रिक्स
और फास्ट फूड का स्टॉक न रखें।

भोजज नियत स्थान पर

शरू से ही बच्चे में ऐसी आदत डालें कि
नाश्ता, लंच या डिनर सिर्फ भोजन के लिए
नियत स्थान या फिर डाइनिंग टेबल पर ही
दिया जाए। इससे उसके भोजन करने का
समय और स्थान निश्चित होगा।

साथ-साथ खायें

अध्ययन बताते हैं कि परिवार के साथ
बैठकर भोजन करने के कई फायदे हैं।
इससे बच्चों में स्मोकिग और अल्कोहल
लेने की आदत भी नहीं पड़ती। साथ खाने
वाले बच्चे स्कूल में अच्छा परफॉर्म करते
हैं। इनमें इंटिंग डिसऑर्डर और मनोरोग भी
कम होते हैं।

पैकेड फूड से दूरी

पैकेज्ड फूड की न्यूट्रीशनल वैल्यू ताजा
पकाए भोजन या फलसब्जियों जैसी नहीं
हो सकती। चूंकि हमारे जीवन में पैकेज्ड
फूड की पूरी तरह घुसपैठ हो चुकी है फिर
भी यथासंभव दूरी बनाएं रखें। पैकेज्ड फूड
में प्रिजर्वेटिव,नमक और शुगर आदि
काफी मात्रा में होते हैं।

पेय पदार्थ का चयन

बच्चों को डिब्बा बंद फूट जूस सॉफ्ट
डिंक, आइसक्रीम आदि देने की बजाय
ताजा फलों का रस नारियल पानी, छाछ
लस्सी या फूट स्मूदीज दें। पानी कम पीने
से बच्चों में सिरदर्द होने लगा है।

भोजज बदल-बदल कर

बच्चों का स्वभाव चचलहोता है, एक ही
जैसे भोजन से वे बोर हो जाते हैं। इसलिए
उनका मन बाजार की चटपटी चीजों की
ओर भागता है। आप अपने मेन्यू में
लगातार बदलाव करती रहें और खाने को
आकर्षक ढंग से परोसे तो बच्चे को घर के
भोजन में रुचि रहने लगती है।

खाते समय रहें प्रसन्न

भोजन करते समय बच्चों के साथ
माहौल को हल्काफुल्का बनाए
रखें। इस वक्त उसके खानपान से
जुड़ी या अन्य किसी आदत का
मजाक न बनाएं। इससे आगे
चलकर कई इमोशनल या
साइकोलॉजिकल समस्याओं से
सुरक्षा मिलती है। बच्चों में ड्रग्स
या शराब जैसे नशीले पदार्थों के
प्रति झुकाव कम होता है।

Note-बच्चों को डिब्बा बंद फूट जूस सॉफ्ट
डिंक, आइसक्रीम आदि देने की बजाय
ताजा फलों का रस नारियल पानी, छाछ
लस्सी या फूट स्मूदीज दें। पानी कम पीने
से बच्चों में सिरदर्द होने लगा है।



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