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ARN
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फेंफड़े हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंग
होते हैं। इनमें हुआ किसी भी प्रकार
का संक्रमण खतरनाक हो सकता है।
खासतौर पर सीने में जब पानी जाने की
समस्या यानी प्लूरल इंफ्यूजन होता है तो
स्थिति फेफड़ों के गलने और यहां तक
सेप्टीसीमिया भी होकर मरीज की जान भी
जा सकती है। हमारे सीने वाले हिस्से पर
मौजूद फेफड़ों की बाहरी लाइनिंग पर प्लूरल
स्पेस होती है। इसमें हार्ट फेल्योर लिवर ।
सिरोसिस लंग्स इंफेक्शन, संक्रमण के साथ
सूजन की स्थिति और किसी प्रकार के
हानिकारक तत्व की मौजूदगी के कारण पानी
भर जाता है। इससे बचाव के लिए रोग के
प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना
चाहिए और डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए
जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से-
लगने वायरल बैक्टीरियल या फंगल
संक्रमण होने पर कैंसर दिल व लिवर की
गंभीर बीमारी भी समस्या का कारण हो
सकती है। इसके अलावा किडनी खराब
होने या इसकी कमजोरी और संक्रमण की
वजह से भी सीने में पानी भरने की आशंका
रहती है।
सोनोग्राफी, एक्सरे आदि जांचों से किया
जाता है। रिपोर्ट में मरीज की स्थिति और
रोग की गंभीरता के आधार पर इलाज तय
किया जाता है।
इस रोग से बचाव के लिए बीमारी के प्रारंभिक
लक्षणों (सांस लेने में सीने में दर्द आदि) को
नजरअदाल नहीं करें। थोड़ी सी भी परेशानी होने
पर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
की सर्जरी नहीं करते। इसमें भरे पानी को
निकालना ही बेहतर विकल्प माना जाता है।
इसके लिए थॉरासेन्टेसिस करते हैं। पीठ की
तरफ के हिस्से को सुन्न करके इसमें एक
ट्यूब डाल देते हैं। इसके जरिए पानी को
बाहर निकाला जाता है। कई मामलों में
इंफेक्शन के कारण हुई परेशानी में
एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाएं देते हैं। लंबे
समय तक संक्रमण पर ध्यान नहीं देने से
स्थिति बिगड़ जाने पर सर्जरी की जरूरत
होती है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बेहतर
उपचार है। थोड़ी सी परेशानी होने पर तुरंत
चिकित्सक से परामर्श लें। स्वयं कभी
डॉक्टर बनने की कोशिश ना करें
होते हैं। इनमें हुआ किसी भी प्रकार
का संक्रमण खतरनाक हो सकता है।
खासतौर पर सीने में जब पानी जाने की
समस्या यानी प्लूरल इंफ्यूजन होता है तो
स्थिति फेफड़ों के गलने और यहां तक
सेप्टीसीमिया भी होकर मरीज की जान भी
जा सकती है। हमारे सीने वाले हिस्से पर
मौजूद फेफड़ों की बाहरी लाइनिंग पर प्लूरल
स्पेस होती है। इसमें हार्ट फेल्योर लिवर ।
सिरोसिस लंग्स इंफेक्शन, संक्रमण के साथ
सूजन की स्थिति और किसी प्रकार के
हानिकारक तत्व की मौजूदगी के कारण पानी
भर जाता है। इससे बचाव के लिए रोग के
प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना
चाहिए और डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए
जानते हैं इस बीमारी के बारे में विस्तार से-
इस कारण भरता है पानी
सीने और फेफड़ों में किसी तरह की चोटलगने वायरल बैक्टीरियल या फंगल
संक्रमण होने पर कैंसर दिल व लिवर की
गंभीर बीमारी भी समस्या का कारण हो
सकती है। इसके अलावा किडनी खराब
होने या इसकी कमजोरी और संक्रमण की
वजह से भी सीने में पानी भरने की आशंका
रहती है।
जरूरी जांचे
सीने में पानी भरने की स्थिति का पतासोनोग्राफी, एक्सरे आदि जांचों से किया
जाता है। रिपोर्ट में मरीज की स्थिति और
रोग की गंभीरता के आधार पर इलाज तय
किया जाता है।
इस रोग से बचाव के लिए बीमारी के प्रारंभिक
लक्षणों (सांस लेने में सीने में दर्द आदि) को
नजरअदाल नहीं करें। थोड़ी सी भी परेशानी होने
पर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
क्या है इलाज
प्लूरल इंफ्यूजन में आमतौर पर किसी प्रकारकी सर्जरी नहीं करते। इसमें भरे पानी को
निकालना ही बेहतर विकल्प माना जाता है।
इसके लिए थॉरासेन्टेसिस करते हैं। पीठ की
तरफ के हिस्से को सुन्न करके इसमें एक
ट्यूब डाल देते हैं। इसके जरिए पानी को
बाहर निकाला जाता है। कई मामलों में
इंफेक्शन के कारण हुई परेशानी में
एंटीबायोटिक्स या अन्य दवाएं देते हैं। लंबे
समय तक संक्रमण पर ध्यान नहीं देने से
स्थिति बिगड़ जाने पर सर्जरी की जरूरत
होती है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बेहतर
उपचार है। थोड़ी सी परेशानी होने पर तुरंत
चिकित्सक से परामर्श लें। स्वयं कभी
डॉक्टर बनने की कोशिश ना करें
लापरवाही न बरतें
लक्षणों के नजरअंदाज करने से समस्या गंभीर रूप ले
सकती है। ऐसे में सीने में पानी भरे रहने से फेफड़े पूरी तरह
से गलने लगते हैं। इस कारण इनमें मवाद पड़ने से संक्रमण
अन्य अंगों में फैल सकता है। फेफड़ों की झिल्ली चिपक
जाती है जिससे सांस लेने में भारीपन महसूस होती है।
संक्रमण के रक्त में फैलने से सेप्टीसीमिया का खतरा बढ़
जाता है जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। इलाज के
बाद डॉक्टरी द्वारा बताई नियमित रूप से लेनी होती है किसी
भी समस्या को नजरअंदाज न करें डॉक्टरी सलाह लें।
मुख्य लक्षण
सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, फेफड़ों के एक भाग में लगातार या लंबे समय तक दर्द बार-बार खांसी, थोड़ी सी देर चलने पर भी सांस फूलने जैसी स्थिति सीने में पानी भरने की ओर इशारा करता है। इंफेक्शन के कारण हुई परेशानी में मरीज को बुखार, ठंड लगना व भूख न लगने जैसी समस्या होती है।
दिल को रखें चुस्त दुरूस्त
बिगड़ी लाइफस्टाइल और अनियमित आहार के कारण 30
से 40 साल की उम्र में ही लोगों को हृदय रोग होने लगे
हैं। हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्टडे मनाया जाता है ताकि
लोगों को हृदय और इससे जुड़े रोगों के प्रति अवेयर किया जा
सके क्योंकि हृदयाघात के लक्षणों को जानना हर किसी के लिए जरूरी है। कई बार इसके लक्षण इतने सामान्य दिखते हैं कि मामूली सा दर्द समझकर टाल दिया जाता है। लेकिन ये कितना घातक है इसका अंदाजा लोगों को नहीं होता है।
कोरोनरी धमनी रोग
यह बीमारी धमनियों में
अपशिष्ट जमा होने के कारण
होती है, जो हृदय में रक्त के
बहाव को रोककर हार्ट स्ट्रोक
के खतरे को बढ़ा देता है।
हाइपरटेंशिव हृदय रोग
यह उच्च रक्त चाप से ग्रस्त
हदय रोग है। उच्च रक्त चाप
दिल औट रक्त वाहिकाओं को
भारी कर देता है, जिसके
परिणामस्वरूप दिल की
बीमारियां होती हैं।
जन्मजात हृदय रोग
यह रोग जन्म के समय हृदय
की संरचना की खराबी के
कारण होता है। जन्मजात
हदय की खराबियां हृदय में
जाने वाले रक्त के सामान्य
प्रवाह को बदल देती हैं।
रुमेटिक हृदय रोग
यह बीमारी रुमेटिक फीवर
से जुड़ी हुई है। यह ऐसी
अवस्था है, जिसमें हृदय के
वाल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
यह प्रक्रिया स्ट्रेप्टोकोकल |
बैक्टीरिया के कारण गले के
संक्रमण से शुरू होती है।
यदि इसका इलाज नहीं
किया जाए तो गले का यह
संक्रमण रूमेटिक बुखार में
बदल जाता है। बार-बार
मेटिक बुखार से ही
रूमेटिक हृदय रोग
विकसित होता है। रूमेटिक
बुखार एक सूजनेवाली
बीमारी है, जो शरीर के
खास कर हृदयजोड़ों,
मतिष्क या त्वचा को जोड़ने
वाले ऊतकों को प्रभावित
करती है।
Comments
Sir plueral infussion bimari ke dava ka korse kitne din ka hota hai normally
ReplyDeleteConsult doctor
ReplyDeleteHlo
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